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प्रिंटर से निकालते थे नोट, फिर रेलवे स्टेशन पर होता था खेल; लाखों की नकली करेंसी के साथ तीन आरोपी हुए गिरफ्तार

 Written By: India TV UP Bureau Desk
 Published : Sep 11, 2026 09:15 am IST,  Updated : Sep 11, 2026 09:16 am IST

कानपुर में पुलिस ने नकली नोटों के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें उनके पास से लाखों रुपये के नकली नोट की करेंसी को बरामद किया गया है।

कानपुर पुलिस की...- India TV Hindi
कानपुर पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। Image Source : REPORTER INPUT

अपराध और अपराधी समय के साथ-साथ अब और एडवांस तरीकों से लोगों के साथ ठगी, जालसाजी और गोरखधंधे के काले कारनामों को अंजाम देने में लगे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में भी एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक किराए का कमरा बाहर से भले ही सामान्य नजर आता था, लेकिन अंदर कथित तौर पर नकली नोटों की ‘फैक्ट्री’ चल रही थी। प्रिंटर पर कागज चढ़ता था और कुछ देर बाद तैयार होकर निकलते थे नकली नोट। इसके बाद इन नोटों को कानपुर सेंट्रल और आसपास के रेलवे स्टेशनों के बाजारों में खपाने की तैयारी होती थी। रेल बाजार पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मास्टरमाइंड 52 साल का शेर सिंह पांचवीं पास है। वह प्रिंटर और दूसरे सामान की मदद से नकली करेंसी तैयार करता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 लाख 4 हजार 650 रुपए के नकली नोट बरामद किए हैं। बरामद करेंसी में 100, 50 और 500 रुपए के नकली नोट शामिल हैं। इसके अलावा कमरे से प्रिंटर, पेपर, इंक और नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान भी मिला है।

रामलीला मैदान के पास कमरे में चल रहा था पूरा खेल

एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय संकल्प शर्मा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया की रेल बाजार थाना क्षेत्र में रामलीला मैदान के पास एक कमरा किराए पर लिया गया था। इसी कमरे में नकली नोट तैयार किए जा रहे थे। पुलिस को गिरोह के बारे में जानकारी मिली तो टीम ने बताए गए ठिकाने पर छापा मारा। कमरे की तलाशी ली गई तो वहां नकली नोटों की खेप के साथ उन्हें तैयार करने का सामान मिला। मौके से बांगरमऊ, उन्नाव के रघुवर खेड़ा निवासी शेर सिंह (52), रोशन अली (24) और जालौन के उरई थाना क्षेत्र के गड़र बिनौर निवासी सोमिल गुप्ता (36) को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, शेर सिंह वर्तमान में चकेरी इलाके में संजू पुलिया के पास किराए के कमरे में रह रहा था।

एक असली के बदले तीन नकली, ऐसे चलता था सौदा

पुलिस की पूछताछ में गिरोह के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी नकली नोटों का सौदा 'एक के बदले तीन' के हिसाब से करते थे। यानी जितनी रकम कोई व्यक्ति देता था, उसके बदले उसे तीन गुना कीमत के नकली नोट दिए जाते थे। कम कीमत वाले नोटों को बाजार में आसानी से चलाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के निशाने पर खास तौर पर रेलवे स्टेशन के आसपास की छोटी दुकानें रहती थीं। स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों और आसपास के बाजारों में भी नकली नोट खपाने की कोशिश की जाती थी।

100 रुपए के नोटों की सबसे बड़ी खेप

पुलिस की छापेमारी में बरामद नकली करेंसी को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि गिरोह छोटे मूल्य के नोटों पर ज्यादा निर्भर था। पुलिस के अनुसार बरामद नकली नोटों में 100 रुपए के 1991 नोट 50 रुपए के 71 नोट और 500 रुपए के 4 नोट शामिल हैं। इन सभी नोटों की कुल कीमत 2,04,650 रुपए है। नकली करेंसी के अलावा पुलिस ने एक प्रिंटर, कैंची, दो पेपर कटर, दो स्केल, चार खाली और पांच भरी हुई इंक की बोतल डिब्बियां, एक रिम पेपर, कपड़े, ट्रॉली बैग और दूसरे उपकरण भी बरामद किए हैं।

सिर्फ नोट नहीं, पुलिस को मिला पूरा सेटअप

पुलिस की कार्रवाई में जिस तरह से प्रिंटर से लेकर इंक और पेपर तक बरामद हुआ है, उससे जांच की दिशा अब इस बात पर भी है कि कमरे में यह काम कितने समय से चल रहा था। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शेर सिंह अकेले नकली नोट तैयार करता था या इसके पीछे कोई और व्यक्ति भी तकनीकी मदद कर रहा था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि तैयार नकली नोट कमरे से निकलने के बाद किन लोगों तक पहुंचते थे।

तीनों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया

पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपी पहले भी आपराधिक मामलों में जेल जा चुके हैं। सोमिल गुप्ता पर 5, रोशन अली पर 7 और शेर सिंह पर 4 आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। पुलिस अब इन मुकदमों की जानकारी जुटाने के साथ आरोपियों के पुराने संपर्कों को भी खंगाल रही है। जांच अधिकारियों को आशंका है कि नकली नोटों की सप्लाई केवल कानपुर तक सीमित नहीं रही होगी।

कहां-कहां पहुंची नकली करेंसी, अब इसका पता लगाएगी पुलिस

गिरोह के तीन सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि अब तक कितनी नकली करेंसी छापी जा चुकी है और बाजार में कितने नोट पहुंच चुके हैं। पुलिस कानपुर सेंट्रल के अलावा आसपास के जिलों के रेलवे स्टेशनों और वहां के बाजारों में भी इस नेटवर्क के संपर्क तलाश रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों को नकली नोट तैयार करने के लिए विशेष पेपर और अन्य सामान कहां से मिलता था। फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। अब पुलिस की जांच नकली नोट छापने वाले कमरे से आगे बढ़कर उस नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश में है, जहां इन नोटों को बाजार में उतारा जाता था।

(रिपोर्ट - अनुराग श्रीवास्तव)

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